Tuesday, December 16, 2008

विकासशील देशों में भी शिक्षा में भारत छठे स्थान तक पिछड़ा क्यों?

आर्थिक रूप से उभर कर आ रहे दुनिया के सात सब से बड़े देशों में शिक्षा के मामले में भारत पिछड़ा हुआ है और इन देशों में उस का क्रम छठा है। शिक्षा के मामले में इन सात देशों में रूस सब से आगे है।
एस्सोचेम (एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स द्वारा कराए गए सर्वे के परिणामों ने बताया है कि भारत की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा क्षेत्र और जंनसाँख्यिक आधार पर गुणवत्ता के मामले में सब से पिछड़ा हुआ है।

शिक्षा के विकास के मामले में रूस के उपरांत चीन दूसरे स्थान पर रहा है, ब्राजील तीसरा, मेक्सिको चौथा, दक्षिण अफ्रीका पांचवाँ, भारत छठा और इंडोनेशिया सातवाँ स्थान प्राप्त कर सका है।

इस सर्वे ने बताया है कि भारत में प्राथमिक शिक्षा सब से अविकसित अवस्था में है। विद्यार्थी शिक्षक अनुपात सब से खराब भारत में है जो 32:1 है, सब से अधिक चीन और ब्राजील में 19:1 है। प्राइवेट स्कूलों की संख्या के मामले में भारत सब से ऊपर है यहाँ माध्यमिक शिक्षा के 42 प्रतिशत विद्यार्थी प्राइवेट स्कूलों में अध्ययन कर रहे हैं। महिला शिक्षा के मामले में भारत की स्थिति शर्मनाक है। रुस और ब्राजील में स्कूलों में विद्यार्थियों की कुल भर्ती में छात्राओं का अनुपात 56 प्रतिशत से अधिक है जब कि भारत में केवल आठ प्रतिशत।

उच्च शिक्षा के मामले में भारत आगे है। लेकिन विश्व के सब से अच्छे 100 बिजनेस स्कूलों में से केवल एक भारत में है जब कि सब से अच्छे 200 विश्वविद्यालयों में से एक भी भारत में नहीं है।

भारत में शिक्षा की इस दुर्दशा का मुख्य कारण प्राथमिक शिक्षा में पिछड़ापन और स्त्री शिक्षा में बहुत पीछे होना है। स्त्री शिक्षा के मामले में भारत का स्थान 116 है।
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